Friday, 18 November 2011
'अनुभूति' .. by Chandrasekhar Nair on Monday, 7 November 2011 at 08:45
अनुभूति ..
निश्चित रूप से
शब्द नहीं व्यक्त कर सकते
मन की हर अनुभूति को ..
मगर फिर भी हम
शब्दों की सीढ़ी पर
उन सूने प्रहरों में अक्सर
घूम आते हैं ..
खो जाते हैं कई बार,
भ्रम मे भी पड़ जाते हैं
मन के उन पन्नों पर
स्मृति के भीति-चित्रों के
संगीत स्वर-मद्धम
बजने लगते हैं जब ..
लौट लौट आते हैं
वो हमारे अपने
उनके साथ
वे स्वर्णिम क्षण -
किताबों की जिल्द पर
धूल छटने लगती है
जैसे दालान मे
दिवाकर की रश्मि
छिड़क रही है
अनुपम अल्पनायें ..
कभी कभी
ये मन कहता है -
ये शब्द !
नही कर सकते
व्यक्त
हर अनुभूति! मन की ..
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ये शब्द !
ReplyDeleteनही कर सकते
व्यक्त
हर अनुभूति! मन की ..
सचमुच, अभिव्यक्ति के लिए कभी कभी शब्द कम पड़ जाते हैं, भावनाओ के विस्तार के आगे की अभिव्यक्ति......बहुत सुंदर शब्दों का चयन किया है आपने......बधाई
बाँचे नहीं जा सकते नेह सम्बन्ध
ReplyDeleteइसी कारण
शब्द कम पड़ जाते हैं
अक्सर !!!
अंजू जी शब्दों का जो चयन है, बड़ा सीमित सा है, आपकी प्रशंसा का बड़ा आभार हैं ..
ReplyDeleteआशीष भाई सही कहा आपने नेह को बाँचना कठिन ..!
ReplyDeleteआपका बड़ा स्नेह है ..
बहुत सुंदर!
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