'तुम्हारी कविता .. अनुपमा' Fri 25, 2011
सुंदर शब्दोँ से
सजी आती
तुम्हारी कविता
कभी मुस्कुराती
खिलखिलाती
तुम्हारी कविता ..
तमस की रातोँ मेँ
दीए की रौशनी है
सवेरोँ को
उजियाला
बनाती
तुम्हारी कविता ..
उदास चेहरोँ
को गुलज़ार कर दे
गुमसुम लबोँ
पर गीत
सजा देती
तुम्हारी कविता ..
गंगा की लहरोँ सी
पावन कर दे
हरदम
जीवन को प्रेरित
कर जाती
तुम्हारी कविता ..

ये पावन हृदय के कोमल उद्गार
ReplyDeleteभाव विभोर है कविता
मिला जो उसे इतना सारा प्यार
होता रहे नित समृद्ध
मन की बातों का निश्छल संसार
लिखती रहे स्याही
नवजीवन, संवेदनाएं और सार
अनायास कविता रच जाये
और हो स्वयं ईशस्वरुप साकार
ऐसे ही होते रहें सदा
शुद्धभाव औ' निर्मल शब्द एकाकार
शुभकामनाएं!
धन्यवाद छोटा सा शब्द मालूम पड़ेगा अनुपमा तुम्हारी पंक्तियों के समक्ष ..
ReplyDeleteसदा उत्साह-वर्धन के आभारी रहेंगे तुम्हारे ..