Saturday, 26 November 2011

'तुम्हारी कविता .. अनुपमा'


'तुम्हारी कविता .. अनुपमा' Fri 25, 2011



सुंदर शब्दोँ से
सजी आती
तुम्हारी कविता
कभी मुस्कुराती
खिलखिलाती
तुम्हारी कविता ..


तमस की रातोँ मेँ
दीए की रौशनी है
सवेरोँ को
उजियाला
बनाती
तुम्हारी कविता ..


उदास चेहरोँ
को गुलज़ार कर दे
गुमसुम लबोँ
पर गीत
सजा देती
तुम्हारी कविता ..


गंगा की लहरोँ सी
पावन कर दे
हरदम
जीवन को प्रेरित
कर जाती
तुम्हारी कविता ..

2 comments:

  1. ये पावन हृदय के कोमल उद्गार
    भाव विभोर है कविता
    मिला जो उसे इतना सारा प्यार
    होता रहे नित समृद्ध
    मन की बातों का निश्छल संसार
    लिखती रहे स्याही
    नवजीवन, संवेदनाएं और सार
    अनायास कविता रच जाये
    और हो स्वयं ईशस्वरुप साकार
    ऐसे ही होते रहें सदा
    शुद्धभाव औ' निर्मल शब्द एकाकार

    शुभकामनाएं!

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  2. धन्यवाद छोटा सा शब्द मालूम पड़ेगा अनुपमा तुम्हारी पंक्तियों के समक्ष ..
    सदा उत्साह-वर्धन के आभारी रहेंगे तुम्हारे ..

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