Friday, 18 November 2011

'गीली मिटटी' .. by Chandrasekhar Nair on Thursday, 3 November 2011 at 03:19



मिट्टी इधर भी गीली है मन की

एक मुद्दत से ..


इस गीली मिट्टी की सतह पर

कुछ छिड़काव रोज़ करते हैँ

नमी बनी रहे, कभी यह सूखने न पाये

दरारें आने न पायें ..


कुछ बीज दिल के पन्नोँ मेँ हुआ करते थे

बचा के रखे थे,

के बोयेँगे वक्त मिलने पर -

मगर उड़ गये जो वक्त के तेज़ थपेड़ोँ के साथ ..


अब इंतज़ार के सहारे जिए जाते हैँ

मगर हवाओँ पे भरोसा कायम है पूरा

कि कहीँ से उड़ा लायेंगी फिर

इक बीज नन्हा सा, उम्मीदोँ का ..


छुपाये हुए वक्त की हरियाली अपने अंदर,

बारिश भी मेहरबाँ होगी

कि कुछ फूल खिलेँगे इस पर

और आयेँगे परिन्दे भी ..


गायेँगे मीठी बानी मेँ गीत

कि माहौल ख़ुशनुमा हो जायेगा

यकीन है हमें अपनी

इस गीली मिटटी पर ..


इसलिए -

मिट्टी इधर भी गीली है मन की

एक मुद्दत से ..

20 comments:

  1. आपकी पहली रचना किन्तु जाने कितने अनुभवों की माटी सहेजे हुए शब्द आकार ले रहे हैं......नवांकुर के लिए शुभकामनाये और सुंदर रचना के लिए बधाई......

    ReplyDelete
  2. बधाई !आपको कविता करते हुए देखना सुखद है !

    ReplyDelete
  3. आपकी ब्लॉग सूचि में 'मन की बातें' का जुड़ना नए आयाम का जुड़ना है!
    शुभकामनाएं!

    ReplyDelete
  4. अंजू जी इसिलए मिटटी गीली रख छोड़ी है, नवांकुरों को अनुकूल शब्द मिलते रहें .. आपका बहुत धन्यवाद ..

    ReplyDelete
  5. आशीष भाई, आपका हमारे इन कच्चे-पक्के शब्दों को पढना हमारे लिए बड़ा सुखद है .. बहुत शुक्रिया ..

    ReplyDelete
  6. Anupama ji, if ever I were a poet, I would have been inspired by your work, which I'm not but am inspired.
    Thanks for your compliments..!

    ReplyDelete
  7. सकारात्मक कविता....

    ReplyDelete
  8. आहा! कितनी सकारात्मक सोच लिये विचारोत्प्रेरक रचना...
    आदरणीय चंद्रशेखर जी
    सादर बधाई.....

    ReplyDelete
  9. This comment has been removed by the author.

    ReplyDelete
  10. यशवंत जी आपके सुझाव के बहुत आभारी रहेंगे ..
    अब देखियेगा word verification हटा दिया है हमने ..
    आशा है अब आसान हो जाएगा पाठक के लिए ..

    ReplyDelete
  11. Dr.Nidhi Tandon ji..
    Thank you very much for your visit & kind words..
    Regards..!

    ReplyDelete
  12. S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib')
    जी आपको हमारे शब्द पसंद आये, बहुत शुक्रिया आपका ..

    ReplyDelete
  13. निवेदिता जी..
    कुछ शब्दों की सहायता से एक प्रयास मात्र यह 'गीली मिटटी' हमारी ..
    आपने सकारात्मक समझा, आपका बहुत धन्यवाद ..!

    ReplyDelete
  14. इसलिए -
    मिट्टी इधर भी गीली है मन की
    एक मुद्दत से ..

    sahi kaha.....
    tabhi kuchh upaj sakta hai man mein
    kuchh anchaahe..anjane se bhaav !!

    just superb !!

    ReplyDelete
  15. ***Punam***ji,
    Thanks for your observation & kind words.
    Regards!

    ReplyDelete
  16. वाह !! कितनी सकारात्मक होती है उम्मीद...
    सपनो के सच होने की...

    ReplyDelete
  17. वाह !! कितनी सकारात्मक होती है उम्मीद...
    सपनो के सच होने की...

    ReplyDelete
  18. आपके शब्दों को आशीर्वचन के रूप में ग्रहण कर कृतार्थ का अनुभव कर रहे हैं .. बनाए रखियेगा जीजी

    ReplyDelete