Monday, 12 December 2011
रिश्तों की कोई उम्र नहीं होती
रिश्तों की कोई उम्र नहीं होती
संध्या का दीपक
जो जोड़ता है
मन को इश्वर से
बाती के रहने तक,
प्रार्थनाएं भी पूर्ण हो जाती हैं
मगर
रिश्तों की कोई उम्र नहीं होती ..
गर्मियों की शाम सरसराती
हवायों का सुखद चैन
सर्दी की दोपहर और
सूरज की वो गुनगुनी
धूप की गर्माहट में,
सिमट जाता है एहसास
अपना काम पूरा कर
आँगन के गमलों में
खिले गेंदे के फूल
अपना रंग और खुशबू
देते हैं बिखेर,
और बिखर जाते हैं
समय के साथ
सागर की उन्मत लहरें
जो घुमड़ती हैं ख्यालों सी
और लौट जाती हैं
अपने तेवर लिए,
माँ के आँचल का
समग्र वात्सल्य
देता है उर्जा ता-उम्र
बनती हैं रिश्तों की
संज्ञाएँ, जुडती हैं
आत्मा से
मगर सचमुच,
नहीं होती रिश्तों की कोई उम्र
इस दुनिया में ..
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ReplyDeletebahut sahi kaha aapne ki rishton ki koi umra nahin hoti....sundar rachna.
ReplyDeletemere blog par bhi aapka swagat hai :)
बहुत प्यारी कविता और प्रार्थना है .. बधाई ब्लॉग के लिए और इस खूबसूरत पोस्ट के लिए .
ReplyDeleteभाई जी !सुन्दर भाव संजोये दिल से उपजी महक से सरबोर करने हेतु आभार ..
ReplyDeleteवाकई रिश्तों की कोई उम्र नहीं होती ....
जो जोड़ता है
ReplyDeleteमन को इश्वर से
बाती के रहने तक,
प्रार्थनाएं भी पूर्ण हो जाती हैं
मगर
रिश्तों की कोई उम्र नहीं होती ..bahut saargarbhit arthpoorn rachna badhai
Anupama ji Thank you for your words of encouragement you always offer ..
ReplyDeleteMonika Jain "मिष्ठी" जी
ReplyDeleteबहुत धन्यवाद आपका ..
अपर्णा दीदी ..
ReplyDeleteआपको ही बधाई, व शुभकामनायें भी आपको ही .. दो सालों में कहाँ से कहाँ लेकर आ गयीं आप हमको ..
Rakesh जी,
ReplyDeleteआपका तहे दिल से शुक्रिया ..
Ashish Pandey "Raj"
ReplyDeleteभैया जय सियाराम ..
बनती हैं रिश्तों की
ReplyDeleteसंज्ञाएँ, जुडती हैं
आत्मा से
मगर सचमुच,
नहीं होती रिश्तों की कोई उम्र
इस दुनिया में ........सचमुच रिश्तों की कोई उम्र नहीं होती, बहुत प्यारी कविता, चुरा रहे हैं भैया
ईमानदार बात पूरी ईमानदारी से अभिव्यक्त होती हुई..सचमुच रिश्तों की तय उम्र नही होती परस्पर सौहार्द्र ही उसे दीर्घजीवी बनाता है..
ReplyDeleteANJU SHARMA
ReplyDeleteअंजू बहन, पूरा अधिकार है तुमको हमारी हर एक वस्तु पर, यह तो मात्र एक विचार है हमारा जो बैठे-बैठे रचना का एक आकार बन गया .. Thank you so much
veena bundela
ReplyDeleteजीजी, सौहार्द का फूल विश्वास / भरोसे के पौधे पर खिलता है और आपके आशीर्वाद से आदतन हम इस पौधे को खूब लगन से सींचा करते हैं .. आपका स्नेह इस छोटे पर बना रहे, यही कामना है जीजी ..