Monday, 12 December 2011

रिश्तों की कोई उम्र नहीं होती






रिश्तों की कोई उम्र नहीं होती




संध्या का दीपक

जो जोड़ता है

मन को इश्वर से

बाती के रहने तक,

प्रार्थनाएं भी पूर्ण हो जाती हैं

मगर

रिश्तों की कोई उम्र नहीं होती ..



गर्मियों की शाम सरसराती

हवायों का सुखद चैन

सर्दी की दोपहर और

सूरज की वो गुनगुनी

धूप की गर्माहट में,

सिमट जाता है एहसास

अपना काम पूरा कर



आँगन के गमलों में

खिले गेंदे के फूल

अपना रंग और खुशबू

देते हैं बिखेर,

और बिखर जाते हैं

समय के साथ



सागर की उन्मत लहरें

जो घुमड़ती हैं ख्यालों सी

और लौट जाती हैं

अपने तेवर लिए,

माँ के आँचल का

समग्र वात्सल्य

देता है उर्जा ता-उम्र



बनती हैं रिश्तों की

संज्ञाएँ, जुडती हैं

आत्मा से

मगर सचमुच,



नहीं होती रिश्तों की कोई उम्र

इस दुनिया में ..






14 comments:

  1. bahut sahi kaha aapne ki rishton ki koi umra nahin hoti....sundar rachna.
    mere blog par bhi aapka swagat hai :)

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  2. बहुत प्यारी कविता और प्रार्थना है .. बधाई ब्लॉग के लिए और इस खूबसूरत पोस्ट के लिए .

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  3. भाई जी !सुन्दर भाव संजोये दिल से उपजी महक से सरबोर करने हेतु आभार ..
    वाकई रिश्तों की कोई उम्र नहीं होती ....

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  4. जो जोड़ता है

    मन को इश्वर से

    बाती के रहने तक,

    प्रार्थनाएं भी पूर्ण हो जाती हैं

    मगर

    रिश्तों की कोई उम्र नहीं होती ..bahut saargarbhit arthpoorn rachna badhai

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  5. Anupama ji Thank you for your words of encouragement you always offer ..

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  6. Monika Jain "मिष्ठी" जी
    बहुत धन्यवाद आपका ..

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  7. अपर्णा दीदी ..
    आपको ही बधाई, व शुभकामनायें भी आपको ही .. दो सालों में कहाँ से कहाँ लेकर आ गयीं आप हमको ..

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  8. Rakesh जी,
    आपका तहे दिल से शुक्रिया ..

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  9. Ashish Pandey "Raj"
    भैया जय सियाराम ..

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  10. बनती हैं रिश्तों की

    संज्ञाएँ, जुडती हैं

    आत्मा से

    मगर सचमुच,



    नहीं होती रिश्तों की कोई उम्र

    इस दुनिया में ........सचमुच रिश्तों की कोई उम्र नहीं होती, बहुत प्यारी कविता, चुरा रहे हैं भैया

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  11. ईमानदार बात पूरी ईमानदारी से अभिव्यक्त होती हुई..सचमुच रिश्तों की तय उम्र नही होती परस्पर सौहार्द्र ही उसे दीर्घजीवी बनाता है..

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  12. ANJU SHARMA
    अंजू बहन, पूरा अधिकार है तुमको हमारी हर एक वस्तु पर, यह तो मात्र एक विचार है हमारा जो बैठे-बैठे रचना का एक आकार बन गया .. Thank you so much

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  13. veena bundela
    जीजी, सौहार्द का फूल विश्वास / भरोसे के पौधे पर खिलता है और आपके आशीर्वाद से आदतन हम इस पौधे को खूब लगन से सींचा करते हैं .. आपका स्नेह इस छोटे पर बना रहे, यही कामना है जीजी ..

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