शुक्रगुजार हूँ उसका ..
साल बीतने को है, बाकी सभी काम तो चलते रहे, इश्वर को शुक्रिया करने के लिए मन से कुछ शब्द निकले , वही हैं यह ..
शुक्रगुजार हूँ उसका
कि जिंदा हूँ
खुश हूँ इस बहार मेँ
मौसम की तपन से
सेँकता हूँ रूह अपनी ..
पीछे छूटे ऊबड़ खाबड़
रास्तोँ की धूल
आखोँ से निकालने की
नाकाम कोशिश करता
ठहरा हूँ दोराहे पर ..
कोई शिकवा नहीँ
उससे
इक इल्तिज़ा बस है
वजह बनू मै
किसी मुस्कान की ..
bhaai hamare to bahan ki muskaan hain...
ReplyDeleteबहुत सुन्दर!
ReplyDeleteThank you Aparna didi
ReplyDeleteThank you Anupama!
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